Tuesday, 8 December 2015

अजीत डोभाल और संघ परिवार के रिश्ते

यह अजीत डोभाल किसके लिए काम कर किया या कर रहा है?

देश के भीतर और बाहर मौजूद खतरे से आगाह करने की जिम्मेदारी भारत के NSA अजीत डोभाल के ही कंधों पर है। आईबी के पूर्व डायरेक्टर की हैसियत से वह देश की सुरक्षा से जुड़े कई अहम मिशनों से जुड़े रहे हैं। आईबी से रिटायर होने के बाद वह विवेकानंद फाउंडेशन के डायरेक्टर बने और रामदेव, अन्ना, मोदी समेत कई लोगों के लिए कूटनीति तैयार की।

अजीत डोभाल और विवेकानंद फाउंडेशन से जुड़ी कुछ खास बातें।   


 

यह फाउंडेशन बना कै कैसे?  
यह फाउंडेशन कन्याकुमारी में स्थित विवेकानंद केंद्र का हिस्सा है, जिसकी स्थापना राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के एकनाथ रानाडे ने की थी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसी विचारधारा पर बना थिंक टैंक विवेकानंद फाउंडेशन आज कल मोदी सरकार के लिए पड़ोसी देशों से संबंध और रणनीतिक मामलों पर इनपुट देने का काम करता है। जिसमें भारत के कई रिटायर्ड आईएएस, आईपीएस, साइंटिस्ट और सैन्य अफसर शामिल हैं। अजीत डोभाल के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) बनने के बाद उनकी जगह एन.सी. विज को फाउंडेशन का डायरेक्टर बनाया गया। फाउंडेशन से जुड़े पूर्व ब्यूरोक्रेट और सेना के पूर्व अधिकारियों के अलावा ज्यादातर लोग श्रमदान के रूप में काम करते हैं। कोई तनख्वाह नहीं लेते

बाबा रामदेव औैर अन्ना हजारे के आंदोलन के दौरान परदे के पीछे की रणनीति और इंटलेक्चुअल इनपुट देने का काम इसी फाउंडेशन ने किया है। रामदेव विवेकानंद फाउंडेशन से लगातार संपर्क में रहते हैं। हालांकि, खुद अजीत डोभाल फाउंडेशन के आंदोलनों में किसी तरह की भूमिका से इंकार करते रहे हैं। दूसरी ओर बाबा रामदेव कहते हैं हम सभी संगठनों से कालाधन वापस लाने में मदद मांग रहे थे। तब फाउंडेशन ने हमारी काफी मदद की। दक्षिणपंथी विचारधारा और संघ के करीब होने के सवाल पर फाउंडेशन के एडिटर केजी सुरेश कहते हैं, अगर राष्ट्रवादी होना राइटविंग या दक्षिणपंथ है, तो हम हैं। लेकिन हमारे यहां सभी दलों के लोग मदद के लिए आते हैं।
विवेकानंद फाउंडेशन यूपीए सरकार की नाक में दम भरने वाली गतिविधियों का केंद्र भी रहा था। परदे के पीछे की तमाम योजनाएं इसी केंद्र में बनीं। जब यूपीए सरकार इशरत जहां एनकाउंटर मामले में नरेंद्र मोदी की घेराबंदी कर रही थे उस वक्त अजीत डोभाल इशरत जहां केस में मोदी के सबसे बड़े पैरोकार बने थे। लालकृष्ण आडवाणी, गोविंदाचार्य, गुरुमूर्ति से लेकर संघ और बीजेपी से जुड़े तमाम सीनियर नेता और विचारक फाउंडेशन के विमर्श कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं। हालांकि फाउंडेशन के लोग आरएसएस के सीधे जुड़ाव से इनकार करते हैं, लेकिन इसके कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों की बड़ी भूमिका साफ तौर पर देखी जाती रही है।


विवेकानंद फाउंडेशन के सलाहकार बोर्ड में एक से बढ़कर एक दिग्गज हैं। बोर्ड में पूर्व सेना प्रमुख वीएन शर्मा, रॉ के पूर्व प्रमुख एके वर्मा, पूर्व वायुसेना अध्यक्ष एस कृष्णास्वामी, पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल, थिंकर एस गुरुमूर्ति, भारतीय प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु के प्रोफेसर आर वैद्यनाथ, पूर्व सेना प्रमुख शंकर रॉय, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान, पूर्व कैबिनेट सचिव प्रभात कुमार, जम्मू-कश्मीर के पूर्व गवर्नर एस. के. सिन्हा, पूर्व बीएसएफ प्रमुख प्रकाश सिंह, पूर्व शहरी विकास सचिव अनिल बैजल, इसरो के पूर्व महानिदेशक वीके सारस्वत, पूर्व सीबाआई प्रमुख सीडी सहाय, रूस में भारत के राजदूत रहे प्रभात शुक्ला समेत कई पूर्व अफसर शामिल हैं।

 

दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित विवेकानंद फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक फंडिंग का बड़ा स्रोत डोनेशन है। देश-विदेश से लोग इस संस्थान को डोनेशन देते हैं। वर्ष 2013 में फाउंडेशन को एक करोड़ 49 लाख 56 हजार रुपए डोनेशन के तौर पर मिले थे। 2 लाख रुपए की ग्रांट विदेश मंत्रालय से मिली। इसी साल मानदेय, सैलरी, फीस और स्टाइपेंड पर 93 लाख 36 हजार रूपए से ज्यादा की राशि खर्च हो गई।















अजीत डोभाल लंबे समय से आरएसएस और संघ परिवार से जुड़े रहे हैं और संघ की रणनीति को सफल बनाने मे अजीत डोभाल के योगदान को भला कौन नहीं जानता, अगर २००९ मे भाजपा की सरकार बन जाती तो अजीत डोभाल को यह पद उसी समय मिल जाता, अन्ना हजारे को गाँधीवादी के तौर पर प्रमोट करना यह सब अजीत डोभाल की ही रणनीति का सफल हिस्सा रहा है, अटल सरकार के समय जब भारतीय विमान को तालिबान द्वारा हाइजैक कर लिया गया था और विमान मे लगभग ढेढ सौ से अधिक यात्री भारतीय थे जिसे कंधार से सुरक्षित लाने की जिम्मेदारी अटल सरकार के उपर थी, तालिबान का शर्त था कि वह भारत के जेलों मे बंद पाकिस्तानी कैदियों को सुरक्षित रिहा करे, उस समय अजीत डोभाल ही ने तालिबान से सिलसिलेवार  वार्ता किया और तालिबान के संपर्क मे बने रहने के बाद पाकिस्तानी कैदियों को  रिहा किया और भारतीय यात्रियों को सुरक्षित स्वदेश लाया गया था, तब यह राज खुलकर लोगों के बीच आ गया कि अजीत डोभाल से पाकिस्तानी आतंकवादियों से क्या रिश्ता था, अजीत डोभाल कैसे इतने घुले मिले रहे? यह किस के लिए काम कर रहे थे,?




















Monday, 7 December 2015

बाबरी मस्जिद को शहीद करने वालों ने बाबरी मस्जिद के साथ साथ भारी संविधान को भी कुचल दिया था ।

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में लिब्राहन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में जिन 68 लोगों को दोषी ठहराया है उनके नाम

विशेष।बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय लिब्रहान जांच आयोग ने करीब साढ़े छ: करोड़ रुपये खर्च करके 16 वर्ष 6 महीने 14 दिन बाद अपनी रिपोर्ट 30 जून 2009 को सरकार को सौंपी दि थी।
लिब्राहन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में जिन 68 लोगों को दोषी ठहराया है। उनके नाम हैं-:
1-आचार्य धर्मेंद्र देव, धर्म संसद
2-आचार्य गिरिराज किशोर , विश्व हिन्दू परिषद
3-ए.के.सरन, तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (सुरक्षा) उत्तर प्रदेश
4-अखिलेश मेहरोत्रा, तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक फैजाबाद
5-अशोक सिंघल, विश्व हिन्दू परिषद
6-अशोक सिन्हा, तत्कालीन सचिव, पर्यटन, उत्तर प्रदेश
7-अटल बिहारी वाजपेयी, भाजपा
8-बद्री प्रसाद तोषनीवाल, विश्व हिन्दू परिषद
9-बैकुंठ लाल शर्मा, विश्व हिन्दू परिषद
10-बाल ठाकरे, शिवसेना
11-बी.पी. सिंघल, विश्व हिन्दू परिषद
12-ब्रह्म दत्त द्विवेदी, भाजपा, तत्कालीन राजस्व मंत्री उत्तर प्रदेश
13-चंपत राय, स्थानीय निर्माण प्रबंधक
14-दाउदयाल खन्ना, भाजपा
15-डी. बी. राय, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक फैजाबाद
16-देवराहा बाबा, संत समाज
17-गुर्जन सिंह, भाजपा/राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
18-गुमानमल लोढ़ा, भाजपा
19-के.एन गोविंदाचार्य, भाजपा
20-एच. वी. शेषाद्रि, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
21-जय भगवान गोयल, शिवसेना
22-जयभान सिंह पवैया, बजरंग दल
23-के.एस .सुदर्शन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
24-कलराज मिश्रा, भाजपा
25-कल्याण सिंह, भाजपा (तत्कालीन मुख्यमंत्री)
26-कुशाभाऊ ठाकरे, भाजपा
27-लालजी टंडन, भाजपा, तत्कालीन ऊर्जा मंत्री, उत्तर प्रदेश
28-लल्लू सिंह चौहान, भाजपा
29-लालकृष्ण आडवाणी, भाजपा
30-महंत अवैद्यनाथ, हिन्दू महासभा
31-महंत नृत्य गोपाल दास, राम जन्मभूमि न्यास
32- महंत परमहंस रामचंद्र दास, विश्व हिन्दू परिषद
33-मोरेश्वर दीनानंत सावे, शिवसेना
34-मोरोपंत पिंगले , शिवसेना
35-मुरली मनोहर जोशी, भाजपा
36-ओम प्रताप सिंह
37-ओंकार भावे, विश्व हिन्दू परिषद
38-प्रमोद महाजन, भाजपा
39-प्रवीण तोगड़िया, विश्व हिन्दू परिषद
40-प्रभात कुमार, तत्कालीन प्रधान सचिव (गृह) उत्तर प्रदेश
41-पुरुषोत्तम नारायण सिंह, विश्व हिन्दू परिषद
42-राजेंद्र गुप्ता, तत्कालीन मंत्री, उत्तर प्रदेश
43-राजेंद्र सिंह उर्फ रज्जू भैया, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
44-राम शंकर अग्निहोत्री, विश्व हिन्दू परिषद
45-रामविलास वेदांती, संत समाज
46-आर. के. गुप्ता, भाजपा, तत्कालीन वित्त मंत्री, उत्तर प्रदेश
47-आर. एन. श्रीवास्तव, तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट, फैजाबाद
48-साध्वी ऋतम्भरा, संत समाज
49-शंकर सिंह वाघेला, भाजपा
50-सतीश प्रधान, शिवसेना
51-श्रीचंद्र दीक्षित, भाजपा
52-सीता राम अग्रवाल
53-एस. पी. गौर, तत्कालीन आयुक्त, उत्तर प्रदेश
54-सुंदर सिंह भंडारी, भाजपा
55-सूर्य प्रताप साही, तत्कालीन मंत्री, उत्तर प्रदेश
56-स्वामी चिन्मयानंद, विश्व हिन्दू परिषद
57-स्वामी सच्चिदानंद साक्षी उर्फ साक्षीजी महाराज, विश्व हिन्दू परिषद
58-एस. वी. एम. त्रिपाठी, तत्कालीन पुलिस महानिदेशक
59-स्वामी सतमित रामजी, संत समाज
60-स्वामी सत्यानंद, संत समाज
61-स्वामी वामदेव, संत समाज
62-उमा भारती, विश्व हिन्दू परिषद
63-यू.पी. वाजपेयी, तत्कालीन उप महानिरीक्षक, फैजाबाद
64-विजयाराजे सिंधिया, भाजपा
65-वी. के. सक्सेना, तत्कालीन मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश
66-विनय कटियार, भाजपा
67- विष्णु हरि डालमिया, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
68-युद्धनाथ पांडेय, शिवसेना