नीतीश कुमार ने शराब बंदी कानून के द्वारा नशामुक्ति का जो अभियान चलाया है उसका असर बिहार मे साफ दिखाई दे रहा है|
शाम होते ही जहां मार्केट में शराब पीकर मदमस्त नौजवान हमारी मां बहनों को गुर्राते आँखों से घूरते थे , शाम होते ही महिलाओं को इंसान की सूरत मे भेड़िया नजर आता था ,लड़किया बाजार से लौटते हुए बदहवासी मे चलती , अब शराब बंदी ने इन सब कारणों को ध्वस्त कर दिया है |
अब हमारी माँ बहनों को मद मस्त आँखों की गुर्राहट का सामना नहीं होगा| अब हमारी माँ बहनों को कोई शराब के नशे मे परेशान नहीं कर पाएगा| अब शाम होते ही मार्केट मे शराब पीने वालों का जमावड़ा नहीं होगा, अपराधिक छवि के लोग शराब के बहाने एक जगह जमा नहीं हो पाएंगे असमाजिक तत्व जो नशे का सहारा लिए बिना अपराध नहीं कर पाता था ऐसे अपराध में भारी कमी आएगी|
दूसरे राज्यों की आेर भी जाने लगी है शराबबंदी की भावना
सीएम नीतीश ने कहा कि शराबबंदी की भावना बिहार की सीमा से निकल कर दूसरे राज्यों की ओर जाने लगी है. झारखंड और यूपी के बाद तमिलनाडु और महाराष्ट्र से भी आवाजें उठने लगी हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड और यूपी की महिलाओं के समूह ने हमको आमंत्रण दिया है कि हमारे यहां शराबबंदी लागू करवाएं. तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने वाला है. वहां डीएमके नेता करुणानिधि के साथ-साथ एआइडीएमके नेता जयललिता भी घोषणा कर चुकी हैं कि यदि उनकी सरकार बनी तो उनके यहां भी पूर्ण शराबबंदी लागू होगी.
महाराष्ट्र के वर्धा से महिलाओं का अाया संवाद
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र के वर्धा से महिलाओं का संवाद आया है. वहां की महिलाएं शराबबंदी के लिए बिहार आकर बधाई देना चाहती हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब आदमी गाढ़ी कमाई का पैसा शराब में बहा देता था. शराब पीकर लोग झगड़ा करते थे. घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएं होती थीं. हमलोगों ने शराबबंदी का माहौल बनाया, आप लोगों ने उसे अपार समर्थन देकर सफल बनाया.
बिहार को फिर से बनाना है गौरवशाली
एक करोड़ 19 लाख लोगों ने न शराब पियेंगे और न पीने देंगे पर हस्ताक्षर कर शपथ पत्र जमा किया है. नौ लाख जगहों पर नारे लिखे गये. उन्होंने कहा कि पुलिस एवं उत्पाद विभाग के अधिकारी अपना काम करते रहेंगे. सबसे जबरदस्त काम महिलाओं और बच्चों ने शराबबंदी के लिए माहौल बना कर किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को फिर से गौरवशाली बनाना है, इसे गौरव के शीर्ष पर पहुंचाना है.
इस्लाम धर्म मे शराब पीना पूरी तरह मना है,
महात्मा गांधी शराब के सेवन को एक प्रमुख सामाजिक बुराई मानते थे। उन्होंने भारत में इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की वकालत की। इसको ध्यान में रखते हुए भारत के संविधान निर्माताओं ने देश को चलाने के निर्देशक नियमों में धारा 47 को शामिल किया, जिसमें कहा गया है कि चिकित्सा उद्देश्य के अतिरिक्त स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नशीले पेयों तथा ड्रग्ज पर सरकार प्रतिबंध लगा सकती है।
गांधी जी की इच्छा को देखते हुए विभिन्न राज्यों, जिनमें तत्कालीन मद्रास प्रोविंस तथा बॉम्बे स्टेट व कई अन्य राज्य शामिल थे, ने शराब के खिलाफ कानून पारित कर दिया। 1954 में भारत की एक चौथाई आबादी इस नीति के अंतर्गत आ गई। गांधी जी के अलावा मोरार जी देसाई बिल्कुल शराब नहीं पीते थे जिन्होंने इस नीति को और बढ़ावा दिया। सही कहा गया है कि किसी कार्य की प्रभावहीनता का एहसास किए बिना हम सभी गलतियां करना पसन्द करते हैं।
बिहार मे शराब बंदी को लेकर नीतीश कुमार ने विपरित हालात मे साहस भरा कदम उठाकर न्याय के साथ विकास के रास्ते को चौड़ा कर दिया है|
शराब का धंधा अनैतिक
मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी के बाद बिहार सरकार को सालाना चार हजार करोड़ रुपये का राजस्व नहीं मिलेगा, इसकी मुझे परवाह नहीं है. मुझे लगता था कि यह धंधा अनैतिक है.
बिहार मे शराब बंदी कानून लागू कर दिया गया
बिहार में शराबबंदी के बाद अब घर के कामकाज में पति अपनी पत्नी का सहयोग कर रहे हैं। राज्य में पूर्ण शराबबंदी को अमलीजामा पहनाने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक कार्यक्रम में बताया कि बेरोजगारी के दिनों में उनके एक बहनोई ( जीजाजी ) को भी शराब की लत थी जिससे परिवार में सब लोग दुखी रहते थे।
डॉक्टर भीमराव आंबेडकर जयंती पर पटना में एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए नीतीश ने साफ कर दिया कि राज्य में शराबबंदी पर पुनर्विचार का सवाल ही नहीं उठता। इसके साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि शराब के किसी भी तरह के विक्रेता, चाहे वे थोक विक्रेता हों या खुदरा विक्रेता, के घाटे की भरपाई राज्य सरकार करेगी। सीएम ने साफ किया कि सरकार आर्थिक घाटे की चिंता न करते हुए इस पाबंदी से समाज पर पड़ने वाले सकारात्मक असर को लेकर बेहद उत्साहित है।
नीतीश ने दावा किया कि जब से राज्य में देसी और विदेशी शराब पर पाबंदी लगी है, गांवों और शहरों में न केवल झगड़ों में कमी आई है बल्कि अपराधिक घटनाओं में भी पुलिस विभाग ने कमी दर्ज की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के कारण ही तमिलनाडु में दोनों प्रमुख दलों को अपने घोषणापत्र में वादा करना पड़ा कि सरकार बनने के बाद वे भी मद्य निषेध की दिशा में कदम उठाएंगे। पड़ोसी राज्य झारखंड से बिहार में शराब की तस्करी की खबरों पर नीतीश ने कहा कि जल्द ही वे झारखंड का दौरा कर वहां की महिलाओं को शराबबंदी के बारे में जागरुक करेंगे और वहां की सरकार पर दबाब बनाने के लिए आंदोलन छेड़ने का आह्वान करेंगे।
पूर्ण शराबबंदी के किसी भी राज्य में सफल नहीं होने संबंधी आलोचकों की दलील पर नीतीश ने साफ कहा कि अगर आज से पहले यह कदम सफल नहीं हुआ तो राज्य सरकार हाथ पर हाथ धरे तो बैठी नहीं रहेगी। एवरेस्ट की सफल चढ़ाई के पहले भी कई बार असफल प्रयास हुए, लेकिन एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नॉर्गे घर पर नहीं बैठे रहे बल्कि उन्होंने प्रयास किया और सफल रहे।
सीएम ने कहा कि उन्हें मालूम हैं कि शराब के व्यापार से होने वाले लाभ के कारण एक तबका इसे विफल करने का प्रयास करेगा लेकिन मेरी सरकार इस कोशिश को विफल कर देगी। हालांकि बिहार में शराबबंदी के नीतीश सरकार के फैसले पर पटना हाईकोर्ट में एक मामला लंबित है जिस पर इस महीने की 19 तारीख को फिर से सुनवाई होगी। कोर्ट ने अपनी पिछली सुनवाई में राज्य सरकार को निर्देश दिया हैं कि जिस स्टॉकिस्ट, होटल या बार वालों के पास शराब का स्टॉक है, उन पर शराब नष्ट करने के लिए फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।जाए।
बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार
बिहार देश का चौथा ऐसा राज्य है जहां शराबबंदी को पूरी तरह लागू कर दिया गया है. ये नीतीश कुमार के चुनावी वादों में सबसे प्रमुख था. इसी महीने की 5 तारीख को नीतीश कुमार ने इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया. नीतीश कुमार का ये ऐसा दांव है जिसका विरोध करना विपक्ष के लिए भी आसान नहीं है. लेकिन बिहार सरकार के इस फैसले की जमीनी हकीकत क्या है, शऱाबबंदी ने किस तरह से लोगों की जिंदगी पर असर डाला है.
गुजरात, नागालैंड और मणिपुर के बाद बिहार देश का चौथा ऐसा राज्य बन गया हैं जहां शराब पर पूरी पाबंदी लागू हो गई है. ये वही राज्य है जहां अवैध शराब ने न जाने कितने लोगों की जान लीं, कितने परिवार तबाह हो गए लेकिन क्या राज्य सरकार का ये फैसला बिहार में एक नए सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद बनेगा. सरकार की नेक नीयति से हम यह कह सकते हैं कि बिहार मे शराब बंदी कानून शत प्रतिशत सफल होगी|