Tuesday, 19 April 2016

भारत की बेटी दीपा करमाकर ने रचा इतिहास

भारत की बेटी दीपा करमाकर ने जिमनास्ट मे नया इतिहास रचकर दुनिया के सामने भारत का सिर उँचा रखने की कड़ी मे अपना अद्भुत योगदान दिया है 


 दीपा करमाकर ने सोमवार को इतिहास रच दिया, वह ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला जिमनास्ट बन गयीं। दीपा ने यहां अंतिम क्वालीफाइंग और परीक्षण टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन कर रियो ओलंपिक का टिकट कटाया। 22 वर्षीय जिमनास्ट ने कुल 52.698 अंक बनाकर अगस्त में होने वाले ओलंपिक की कलात्मक (आर्टिस्टिक) जिमनास्टिक्स में जगह बनायी। पहली भारतीय महिला के अलावा वह 52 साल लंबे अंतराल बाद खेलों के महासमर के लिये क्वालीफाइंग करने वाली पहली भारतीय जिमनास्ट भी हैं

ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्‍व करने जा रही दीपा ने अपना दर्द बयां किया. उन्‍होंने बीबीसी से बात करते हुए एक बार कहा था कि एक बार उनके पास पहनने के लिए जूते नहीं थे और उन्‍होंने किसी दूसरे से जूते उधार में लिये और ढीले-ढाले कपड़ों से ही जिमनास्‍ट स्‍पर्धा में हिस्‍सा लिया था.
 
   दीपा करमाकर राष्‍ट्रीय,अंतरराष्‍ट्रीय स्‍पर्धाओं में कूल 77 मेडल जीत चुकी हैं. जिसमें 67 गोल्‍ड मेडल शामिल हैं.

52 सालों के बाद ओलंपिक के लिए क्‍वालिफाई करके देश का मान बढ़ाने वाली देश की पहली भारतीय महिला         जिमनास्ट दीपा करमाकर का सफर काफी कांटों भरा रहा   है.कभी सपाट पैर के कारण उन्‍हें इस खेल का हिस्‍सा नहीं     बनाया जा रहा था, लेकिन दीपा ने अपने दृढ संकल्प से आज इस खेल का हिस्‍सा भर नहीं हैं, बल्कि 52 सालों में ओलंपिक के लिए क्‍वालिफाई करके उन्‍होंने देश का मान बढ़ाया है.

 9 अगस्‍त 1993 को अगरतला के त्रिपुरा में जन्‍मीं दीपा         करमाकर महज 6 साल की उम्र से ही जिमनास्‍ट कर रही हैं 



ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय जिम्नास्ट बनकर इतिहास रचने के कुछ घंटों के बाद दीपा करमाकर ने  रियो ओलंपिक खेलों की परीक्षण प्रतियोगिता में वाल्ट्स फाइनल में स्वर्ण पदक जीता.
भारत की बेटियों ने समय समय पर अपने कुशल कौशल से दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है चाहे एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज हो या सानिया मिर्जा या फिर सायना नेहवाल इत्यादि 
अंजू बॉबी जॉर्ज ने 2005 के मोनाक वर्ल्ड एथलेटिक्स के फाइनल में सिल्वर मेडल जीता था, लेकिन अब भारत की ओर से वर्ल्ड एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीतनेवाली पहली भारतीय महिला एथलीट बन गयी  

बेटी कहीं से भी बेटों से पीछे नहीं है बस माता पिता के इमांदारी भरा ध्यान की आवश्यकता है , बेटे का तरह बेटी पर ध्यान दिया जाए तो वह बेटों से काफी आगे निकल जाए ,  दीपा करमकार समय समय पर बेटियों को प्रेरणा स्रोत के तौर पर जन्म लेती है ताकि यह फिर से साबित हो सके कि बेटी कहीं से भी बेटे से पीछे नहीं 

भारत की बेटी ने रचा इतिहास

भारत की बेटी दीपा करमाकर ने जिमनास्ट मे नया इतिहास रचकर दुनिया के सामने भारत का सिर उँचा रखने की कड़ी मे अपना अद्भुत योगदान दिया है 


 दीपा करमाकर ने सोमवार को इतिहास रच दिया, वह ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला जिमनास्ट बन गयीं। दीपा ने यहां अंतिम क्वालीफाइंग और परीक्षण टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन कर रियो ओलंपिक का टिकट कटाया। 22 वर्षीय जिमनास्ट ने कुल 52.698 अंक बनाकर अगस्त में होने वाले ओलंपिक की कलात्मक (आर्टिस्टिक) जिमनास्टिक्स में जगह बनायी। पहली भारतीय महिला के अलावा वह 52 साल लंबे अंतराल बाद खेलों के महासमर के लिये क्वालीफाइंग करने वाली पहली भारतीय जिमनास्ट भी हैं

ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्‍व करने जा रही दीपा ने अपना दर्द बयां किया. उन्‍होंने बीबीसी से बात करते हुए एक बार कहा था कि एक बार उनके पास पहनने के लिए जूते नहीं थे और उन्‍होंने किसी दूसरे से जूते उधार में लिये और ढीले-ढाले कपड़ों से ही जिमनास्‍ट स्‍पर्धा में हिस्‍सा लिया था.
 
   दीपा करमाकर राष्‍ट्रीय,अंतरराष्‍ट्रीय स्‍पर्धाओं में कूल 77 मेडल जीत चुकी हैं. जिसमें 67 गोल्‍ड मेडल शामिल हैं.

52 सालों के बाद ओलंपिक के लिए क्‍वालिफाई करके देश का मान बढ़ाने वाली देश की पहली भारतीय महिला         जिमनास्ट दीपा करमाकर का सफर काफी कांटों भरा रहा   है.कभी सपाट पैर के कारण उन्‍हें इस खेल का हिस्‍सा नहीं     बनाया जा रहा था, लेकिन दीपा ने अपने दृढ संकल्प से आज इस खेल का हिस्‍सा भर नहीं हैं, बल्कि 52 सालों में ओलंपिक के लिए क्‍वालिफाई करके उन्‍होंने देश का मान बढ़ाया है.

 9 अगस्‍त 1993 को अगरतला के त्रिपुरा में जन्‍मीं दीपा         करमाकर महज 6 साल की उम्र से ही जिमनास्‍ट कर रही हैं 



ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय जिम्नास्ट बनकर इतिहास रचने के कुछ घंटों के बाद दीपा करमाकर ने  रियो ओलंपिक खेलों की परीक्षण प्रतियोगिता में वाल्ट्स फाइनल में स्वर्ण पदक जीता.

 

Monday, 18 April 2016

चंदा कोचर कुशल प्रबंधन, मेहनत और अनुशासन के बल पर कामयाबी के शिखर तक पहुँची साथ ही एक माँ के रूप मे मदर इंडिया का रीयल रॉल को भी निभाती रही |

चंदा कोचर न केवल एक अच्छी कुशल प्रबंधक है बल्कि बच्चों के लिए एक अच्छी माँ भी

                  आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर का नाम आज शक्तिशाली महिलाओं की सूची में शामिल हैं। मैनेजमेंट ट्रेनी की छोटी सी पोस्ट से बैंक के उच्चतम पद तक पहुंचने वाली चंदा की सफलता महिला सशक्तिकरण का एक आदर्श उदाहरण है।

                  आज चंदा कई महिलाओं की प्रेरणा हैं। उनके जज्बे और मेहनत से उन्हें आगे बढ़ने की सीख मिलती है। चंदा कोचर भले ही आज ऊंची पोस्ट पर हो लेकिन घर में वे एक मां ही हैं और जिन्होंने अपने काम और परिवार के बीच एक संतुलन बनाकर रखा हुआ है। बेटी के सवाल पर कि कैसे वे दोनों कार्यक्षेत्रों को बाखूबी निभा लेती हैं पर चंदा कोचर ने अपनी बेटी के नाम एक खत लिखा है जिसमें उन्होंने अपनी जिंदगी के अनुभवों को शेयर किया कि किस तरह अपने माता-पिता के बनाए अनुशासन पर ही उन्होंने अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाया है।

                             चंदा कोचर का यह पत्र सुधा मेनन द्वारा संकलित किताब अपनी बेटियों के लिए प्रख्यात माता-पिता से विरासत पत्र में छपा है। इसमें चंदा कोचर ने अपनी बेटी आरती को संबोधित करते हुए लिखा है कि प्रिय आरती आज मुझे तुम्हें अपने से आगे जाते देख बहुत गर्व महसूस हो रहा है। तुम दिन पर दिन आगे बढ़ती जा रही हो। तुम्हारी कामयाबी ने मुझे अपने दिन याद दिला दिए। जीवन के जिस दौर से तुम गुजर रही हो उसी दौर में मैने भी बहुत कुछ सीखा है। मुझे पता है बच्चे अपने माता-पिता को देख कर ही सीखते हैं और मुझे गर्व है कि जो मैंने अपने परिवार से पाया वो सब काबिलियत तुम में भी है। तुम्हारे नाना-नामी ने हम दोनों बहनों और भाई को एक जैसी परवरिश और संस्कार दिए हैं। एक जैसी सोच के साथ हमारा पालन हुआ है। मैं बस 13 साल की थी जब तुम्हारे नाना की मौत हो गई थी और उनके बिना हम जीने की कल्पना तक नहीं कर सकते थे। तब हमारे सामने घर चलाने की सबसे बड़ी चुनौती थी और तुम्हारी नानी ने हम तीनों को संभाला और हिम्मत से हमारा पालन-पोषण किया क्योंकि सारी जिम्मेदारियां उनके कंधों पर आ गई थी। तुम्हारी नानी ने सारी जिम्मेदारियां बाखूबी निभाई और आज उन्हीं की बदौलत हम आज ये मुकाम हासिल कर पाए। माता-पिता की सबसे बड़ी ड्यूटी अपने बच्चों की देखभाल होती है जो कि फुल टाइम जॉब की तरह है। मुझे वो दिन याद है जब तुम यू.एस में पढ़ रही थी और मुझे आईसीआईसीआई बैंक का सीईओ बनाया गया था कुछ दिनों बाद तुम्हारा मेल आया जिसमें तुमने लिखा था कि आपने हमें कभी महसूस नहीं होने दिया कि आप एक सफल महिला हो और कैसे एक तनावपूर्ष करियर के बाद भी हमें संभाला। घर पर आप सिर्फ और सिर्फ एक मां थीं। चंदा कोचर ने खत के आखिर में लिखा-आरती जिंदगी में कुछ हासिल करने की इच्छा दिल और दिमाग में हमेशा रहनी चाहिए लेकिन इन सबके बीच एक बात जरूरी है कि आप जो भी कर रहे हो उसके लिए ईमानदार रहो। कभी अपने सपनों को खत्म मत होने दो बल्कि उनको पूरा करो। वहीं अपने ईर्द-गिर्द को लोगों की भावनाओं का ध्यान भी जरूर रखना चाहिए। एक आखिरी बात कि जब तुम तनाव में हो तो और ये आफको आगे नहीं बढ़ने दे रहा तो यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है क्योंकि अच्छे और बुरे दोनों दिन आपके जिंदगी का हिस्सा होते हैं, उसे एक बराबर रखो। 

Saturday, 16 April 2016

नीतीश कुमार ने नशामुक्त राष्ट्र बनाने की पहल बिहार की भूमि से शूरू किया

नीतीश कुमार ने शराब बंदी कानून के द्वारा नशामुक्ति का जो अभियान चलाया है उसका असर बिहार मे साफ दिखाई दे रहा है|
शाम होते ही जहां मार्केट में शराब पीकर मदमस्त नौजवान हमारी मां बहनों को गुर्राते आँखों से घूरते थे , शाम होते ही महिलाओं को इंसान की सूरत मे भेड़िया नजर आता था ,लड़किया बाजार से लौटते हुए बदहवासी मे चलती , अब शराब बंदी ने इन सब कारणों को ध्वस्त कर दिया है |
अब हमारी माँ बहनों को मद मस्त आँखों की गुर्राहट का सामना नहीं होगा| अब हमारी माँ बहनों को कोई शराब के नशे मे परेशान नहीं कर पाएगा| अब शाम होते ही मार्केट मे शराब पीने वालों का जमावड़ा नहीं होगा, अपराधिक छवि के लोग शराब के बहाने एक जगह जमा नहीं हो पाएंगे असमाजिक तत्व जो नशे का सहारा लिए बिना अपराध नहीं कर पाता था ऐसे अपराध में भारी कमी आएगी|

दूसरे राज्यों की आेर भी जाने लगी है शराबबंदी की भावना

सीएम नीतीश ने कहा कि शराबबंदी की भावना बिहार की सीमा से निकल कर दूसरे राज्यों की ओर जाने लगी है. झारखंड और यूपी के बाद तमिलनाडु और महाराष्ट्र से भी आवाजें उठने लगी हैं. मुख्यमंत्री ने  कहा कि  झारखंड और यूपी की महिलाओं के समूह ने हमको आमंत्रण दिया है कि हमारे यहां शराबबंदी लागू करवाएं. तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने वाला है. वहां डीएमके नेता करुणानिधि के साथ-साथ  एआइडीएमके नेता जयललिता भी घोषणा कर चुकी हैं कि यदि उनकी सरकार बनी तो उनके यहां भी पूर्ण शराबबंदी लागू होगी. 

 
महाराष्ट्र के वर्धा से महिलाओं का अाया संवाद

मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र के वर्धा से महिलाओं का संवाद आया है. वहां की महिलाएं शराबबंदी के लिए बिहार आकर बधाई देना चाहती हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब आदमी गाढ़ी कमाई का पैसा शराब में बहा देता था. शराब पीकर लोग झगड़ा करते थे. घरेलू हिंसा की  शिकार महिलाएं होती थीं. हमलोगों ने शराबबंदी का माहौल बनाया, आप लोगों ने  उसे अपार समर्थन देकर सफल बनाया.  

 
बिहार को फिर से बनाना है गौरवशाली 
एक करोड़ 19 लाख लोगों ने न शराब पियेंगे और न पीने देंगे पर हस्ताक्षर कर शपथ पत्र जमा किया है.  नौ लाख जगहों पर नारे लिखे गये. उन्होंने कहा कि पुलिस  एवं उत्पाद विभाग के अधिकारी अपना काम करते रहेंगे. सबसे जबरदस्त काम महिलाओं और बच्चों ने शराबबंदी के लिए माहौल बना कर किया. मुख्यमंत्री ने कहा  कि बिहार को फिर से गौरवशाली बनाना है, इसे गौरव के शीर्ष पर पहुंचाना है. 

इस्लाम धर्म मे शराब पीना पूरी तरह मना है, 

 महात्मा गांधी शराब के सेवन को एक प्रमुख सामाजिक बुराई मानते थे। उन्होंने भारत में इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की वकालत की। इसको ध्यान में रखते हुए भारत के संविधान निर्माताओं ने देश को चलाने के निर्देशक नियमों में धारा 47 को शामिल किया, जिसमें कहा गया है कि चिकित्सा उद्देश्य के अतिरिक्त स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नशीले पेयों तथा ड्रग्ज पर सरकार प्रतिबंध लगा सकती है।


गांधी जी की इच्छा को देखते हुए विभिन्न राज्यों, जिनमें तत्कालीन मद्रास प्रोविंस तथा बॉम्बे स्टेट व कई अन्य राज्य शामिल थे, ने शराब के खिलाफ कानून पारित कर दिया। 1954 में भारत की एक चौथाई आबादी इस नीति के अंतर्गत आ गई। गांधी जी के अलावा मोरार जी देसाई बिल्कुल शराब नहीं पीते थे जिन्होंने इस नीति को और बढ़ावा दिया। सही कहा गया है कि किसी कार्य की प्रभावहीनता का एहसास किए बिना हम सभी गलतियां करना पसन्द करते हैं।

बिहार मे शराब बंदी को लेकर नीतीश कुमार ने विपरित हालात मे साहस भरा कदम उठाकर न्याय के साथ विकास के रास्ते को चौड़ा कर दिया है|

शराब का धंधा अनैतिक
मुख्यमंत्री  ने कहा कि शराबबंदी के बाद बिहार सरकार को सालाना चार हजार करोड़ रुपये का राजस्व नहीं मिलेगा, इसकी मुझे परवाह नहीं है. मुझे लगता था कि यह धंधा अनैतिक है.  


 

बिहार मे शराब बंदी कानून लागू कर दिया गया


बिहार में शराबबंदी के बाद अब घर के कामकाज में पति अपनी पत्नी का सहयोग कर रहे हैं। राज्य में पूर्ण शराबबंदी को अमलीजामा पहनाने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक कार्यक्रम में बताया कि बेरोजगारी के दिनों में उनके एक बहनोई ( जीजाजी ) को भी शराब की लत थी जिससे परिवार में सब लोग दुखी रहते थे।

डॉक्टर भीमराव आंबेडकर जयंती पर पटना में एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए नीतीश ने साफ कर दिया कि राज्य में शराबबंदी पर पुनर्विचार का सवाल ही नहीं उठता। इसके साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि शराब के किसी भी तरह के विक्रेता, चाहे वे थोक विक्रेता हों या खुदरा विक्रेता, के घाटे की भरपाई राज्य सरकार करेगी। सीएम ने साफ किया कि सरकार आर्थिक घाटे की चिंता न करते हुए इस पाबंदी से समाज पर पड़ने वाले सकारात्‍मक असर को लेकर बेहद उत्साहित है।  

नीतीश ने दावा किया कि जब से राज्य में देसी और विदेशी शराब पर पाबंदी लगी है, गांवों और शहरों में न केवल झगड़ों में कमी आई है बल्कि अपराधिक घटनाओं में भी पुलिस विभाग ने कमी दर्ज की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के कारण ही तमिलनाडु में दोनों प्रमुख दलों को अपने घोषणापत्र में वादा करना पड़ा कि सरकार बनने के बाद वे भी मद्य निषेध की दिशा में कदम उठाएंगे। पड़ोसी राज्य झारखंड से बिहार में शराब की तस्करी की खबरों पर नीतीश ने कहा कि जल्द ही वे झारखंड का दौरा कर वहां की महिलाओं को शराबबंदी के बारे में जागरुक करेंगे और वहां की सरकार पर दबाब बनाने के लिए आंदोलन छेड़ने का आह्वान करेंगे।
 
पूर्ण शराबबंदी के किसी भी राज्य में सफल नहीं होने संबंधी आलोचकों की दलील पर नीतीश ने साफ कहा कि अगर आज से पहले यह कदम सफल नहीं हुआ तो राज्य सरकार हाथ पर हाथ धरे तो बैठी नहीं रहेगी। एवरेस्ट की सफल चढ़ाई के पहले भी कई बार असफल प्रयास हुए, लेकिन एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नॉर्गे घर पर नहीं बैठे रहे बल्कि उन्होंने प्रयास किया और सफल रहे।

सीएम ने कहा कि उन्‍हें मालूम हैं कि शराब के व्‍यापार से होने वाले लाभ के कारण एक तबका इसे विफल करने का प्रयास करेगा लेकिन मेरी सरकार इस कोशिश को विफल कर देगी। हालांकि बिहार में शराबबंदी के नीतीश सरकार के  फैसले पर पटना हाईकोर्ट में एक मामला लंबित है जिस पर इस महीने की 19 तारीख को फिर से सुनवाई होगी। कोर्ट ने अपनी पिछली सुनवाई में राज्य सरकार को निर्देश दिया हैं कि जिस स्टॉकिस्ट, होटल या बार वालों के पास शराब का स्‍टॉक है, उन पर शराब नष्‍ट करने के लिए फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।जाए।


बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार 

 बिहार देश का चौथा ऐसा राज्य है जहां शराबबंदी को पूरी तरह लागू कर दिया गया है. ये नीतीश कुमार के चुनावी वादों में सबसे प्रमुख था. इसी महीने की 5 तारीख को नीतीश कुमार ने इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया. नीतीश कुमार का ये ऐसा दांव है जिसका विरोध करना विपक्ष के लिए भी आसान नहीं है. लेकिन बिहार सरकार के इस फैसले की जमीनी हकीकत क्या है, शऱाबबंदी ने किस तरह से लोगों की जिंदगी पर असर डाला है.

गुजरात, नागालैंड और मणिपुर के बाद बिहार देश का चौथा ऐसा राज्य बन गया हैं जहां शराब पर पूरी पाबंदी लागू हो गई है. ये वही राज्य है जहां अवैध शराब ने न जाने कितने लोगों की जान लीं, कितने परिवार तबाह हो गए लेकिन क्या राज्य सरकार का ये फैसला बिहार में एक नए सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद बनेगा. सरकार की नेक नीयति से हम यह कह सकते हैं कि बिहार मे शराब बंदी कानून शत प्रतिशत सफल होगी|