मोदी से केजरीवाल के नहीं, राष्ट्र के सवाल हैं यह। जिन मतदाताओं के जनादेश पर वे राजकाज के अधिकारी बनने वाले हैं, उन्हें मोदी इन सवालों का जवाब क्यों नहीं देते।… केशरिया कयामत हर कीमत पर रोक दी जाये, यह लोक गणराज्य भारत के अस्तित्व का बुनियादी सवाल है।
अरविंद केजरीवाल ने गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्रित्व के भाजपाई दावेदार नरेंद्र मोदी से जो सोलह सवाल पूछे हैं, वे दरअसल अरविंद के सवाल हैं नही, ये सावाल राष्ट्र की ओर से हैं, जो समय समय पर उठाये जाते रहे हैं।
गुजरात दौरे पर अरविन्द ने नरेन्द्र मोदी सरकार पर जमकर कटाक्ष किये हैं। अरविन्द ने कहा है कि, गुजरात में विकास के बारे में नरेंद्र मोदी जो दावे करते हैं, वे खोखले हैं। केजरीवाल ने कहा कि मोदी के तमाम दावे झूठ की बुनियाद पर टिके हैं। उनके सरकार में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। यदि गुजरात को नरेन्द्र मोदी कृषि प्रधान देश बता रहे हैं तो किसानों के सामने ऐसी स्थित क्यों आ जाती है जिसके लिए उन्हें आत्महत्या करना पड़ रहा है। आइये हम आपको बताते हैं उन सोलह सवालों के बारे में जिनके जवाब अरविंद केजरीवाल नरेन्द्र मोदी से जानना चाहते थे।
केजरीवाल के नरेन्द्र मोदी से सवाल
1. क्या आप प्रधानमंत्री बनने के बाद केजी बेसिन से निकली गैस के दाम बढ़ायेंगे?
2. पढ़े-लिखे युवाओं को ठेके पर नौकरी क्यों दे रहे हैं और उन्हें मात्र 5300 रुपये प्रति महीना दे रहे हैं, इतने में कोई कैसे जिन्दगी चलायेगा?
3. पिछले दस सालों में राज्य में लघु उद्योग क्यों बंन्द हुये हैं?
4. किसानों की जमीनें बड़े उद्योगपतियों को कौड़ियों के भाव क्यों दिये जा रहे? आपने किसानों की जमीन छीनकर अडानी और अंबानी को दे दी है।
5. आपके पास कितने निजी हेलिकॉप्टर या प्लेन हैं? आपने ये खरीदे हैं या बतौर तोहफा मिला है? आपकी हवाई यात्राओं पर कितना खर्च आता है और इसके लिये पैसे कहांँ से आते हैं?
6. गुजरात के सरकारी अस्पतालों में इलाज की सुविधा क्यों नहीं है?
7. आपने हाल में पंजाब में कहा था कि कच्छ के सिख किसानों की जमीन नहीं छीनी जायेगी, तो इस मामले में गुजरात सरकार सुप्रीम कोर्ट क्यों गयी है?
8. गुजरात में विकास के दावे झूठे हैं, मोदी जी आप बताइए कि गुजरात में कहांँ विकास हुआ है?
9. आपके मंत्रिमंडल में दागी मंत्री क्यों शामिल है, बाबू भाई बुखेरिया और पुरुषोत्तम सोलंकी जैसे दागी मंत्री सरकार का हिस्सा कैसे बने हुये हैं?
10. मुकेश अंबानी से आपके क्या रिश्ते हैं, आपने अंबानी परिवार के दामाद सौरभ पटेल को मंत्रिमंडल में क्यों जगह दी?
11. गुजरात में सरकारी स्कूलों के हालात बदहाल क्यों है?
12. सरकारी दफ्तरों में बहुत ज्यादा करप्शन है, विभागों में भारी भ्रष्टाचार क्यों है?
13. कच्छ के किसानों को पानी नर्मदा बांध के बावजूद आज तक क्यों नहीं मिला? सारा पानी उद्योगपतियों को दे दिया गया।
14. गुजरात के किसान बेहाल है। किसान खुदकुशी कर रहे हैं। हाल के वर्षों में गुजरात में 800 किसानों ने खुदकुशी की, क्यों?
15. प्रदेश में रोजगार का बुरा हाल क्यों है और बेरोजगारी क्यों बढ़ी है?
16. चार लाख किसानों ने बिजली के लिये कई साल से आवेदन दिया है, उन्हें अब तक बिजली क्यों नहीं मिली है?
हम न आप के समर्थक हैं और न हम राजनीतिक दलों के दफ्तरों के घेराव का समर्थन करते हैं। लेकिन इन सवालों का जबाव नहीं मिला तो हमें पुनर्विचार अवश्य करना चाहिए। क्या नमोमय भारत ही इस लोकगणराज्य का भविष्य है। जिस नमो की सुनामी है,वह सवालों से भागता है तो देस में लोकतंत्र की क्या हालत होगी। क्या हमें नमोमय भारत बनने देने की मुहिम में शामिल हो जाना चाहिए उनकी जबावदेही से मुकरने के बावजूद, बुनियादी सवाल अब यह है।
अगर आर्थिक सुधारों और कारपोरेट राज के खिलाफ आपकी लड़ाई है तो आपको यह समझ ही लेना चाहिए केशरिया राष्ट्र में खुदरा कारोबार को पहले ही हरी झंडी दे चुके मोदी अमेरिकी जायनवादी समर्थन से अगर इस देश का प्रधानमंत्री बने तो भारतीय संविधान जो बदलेगा सो बदलेगा, समता और सामाजिक न्याय का जो होगा सो होगा, धर्मोन्माद से देश जो लहूलुहान होगा सो होगा, बल्कि देश की संघीय ढांचा तहस नहस हो जायेगा और पूरा देश तब गुजरात होगा।
कैसा गुजरात, उसकी छवि अरविंद के सवालों की पृष्ठभूमि में साफ तौर पर उभर ही आयी है।
इसके अलावा अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी हितों का असर इतना ज्यादा होगा कि गरीबों की क्या कहें, छोटी पूंजी और मंझोली पूंजी वाले काोबरियं का सत्यानाश भी तय है। पीएफ पेंशन तक बाजार में जो जायेगा, सो जायेगा, विनिवेश और निजीकरण का जो तूफान आयेगा, सो आयेगा, लेकिन करप्रणाली का सारा बोझ आम जनता के कंधे पर डालने का जो स्त्रीविरोधी वर्णवर्चस्वी संघी आर्थिक एजंडा है, उसके तहत जाति धर्म निर्विशेष गरीबों का सफाया हो ही जायेगा। फिर आप अस्मिताओं के ठेकेदारों के मुंह ताकते रह जायेंगे जो अंततः घनघर वंशवादी हैं और जिनकी दृष्टि में भारत नहीं है।