भारत की बेटी दीपा करमाकर ने जिमनास्ट मे नया इतिहास रचकर दुनिया के सामने भारत का सिर उँचा रखने की कड़ी मे अपना अद्भुत योगदान दिया है
दीपा करमाकर ने सोमवार को इतिहास रच दिया, वह ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला जिमनास्ट बन गयीं। दीपा ने यहां अंतिम क्वालीफाइंग और परीक्षण टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन कर रियो ओलंपिक का टिकट कटाया। 22 वर्षीय जिमनास्ट ने कुल 52.698 अंक बनाकर अगस्त में होने वाले ओलंपिक की कलात्मक (आर्टिस्टिक) जिमनास्टिक्स में जगह बनायी। पहली भारतीय महिला के अलावा वह 52 साल लंबे अंतराल बाद खेलों के महासमर के लिये क्वालीफाइंग करने वाली पहली भारतीय जिमनास्ट भी हैं
ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने जा रही दीपा ने अपना दर्द बयां किया. उन्होंने बीबीसी से बात करते हुए एक बार कहा था कि एक बार उनके पास पहनने के लिए जूते नहीं थे और उन्होंने किसी दूसरे से जूते उधार में लिये और ढीले-ढाले कपड़ों से ही जिमनास्ट स्पर्धा में हिस्सा लिया था.
दीपा करमाकर राष्ट्रीय,अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में कूल 77 मेडल जीत चुकी हैं. जिसमें 67 गोल्ड मेडल शामिल हैं.
52 सालों के बाद ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करके देश का मान बढ़ाने वाली देश की पहली भारतीय महिला जिमनास्ट दीपा करमाकर का सफर काफी कांटों भरा रहा है.कभी सपाट पैर के कारण उन्हें इस खेल का हिस्सा नहीं बनाया जा रहा था, लेकिन दीपा ने अपने दृढ संकल्प से आज इस खेल का हिस्सा भर नहीं हैं, बल्कि 52 सालों में ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करके उन्होंने देश का मान बढ़ाया है.
9 अगस्त 1993 को अगरतला के त्रिपुरा में जन्मीं दीपा करमाकर महज 6 साल की उम्र से ही जिमनास्ट कर रही हैं
ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय जिम्नास्ट बनकर इतिहास रचने के कुछ घंटों के बाद दीपा करमाकर ने रियो ओलंपिक खेलों की परीक्षण प्रतियोगिता में वाल्ट्स फाइनल में स्वर्ण पदक जीता.
भारत की बेटियों ने समय समय पर अपने कुशल कौशल से दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है चाहे एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज हो या सानिया मिर्जा या फिर सायना नेहवाल इत्यादि
अंजू बॉबी जॉर्ज ने 2005 के मोनाक वर्ल्ड एथलेटिक्स के फाइनल में सिल्वर मेडल जीता था, लेकिन अब भारत की ओर से वर्ल्ड एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीतनेवाली पहली भारतीय महिला एथलीट बन गयी
बेटी कहीं से भी बेटों से पीछे नहीं है बस माता पिता के इमांदारी भरा ध्यान की आवश्यकता है , बेटे का तरह बेटी पर ध्यान दिया जाए तो वह बेटों से काफी आगे निकल जाए , दीपा करमकार समय समय पर बेटियों को प्रेरणा स्रोत के तौर पर जन्म लेती है ताकि यह फिर से साबित हो सके कि बेटी कहीं से भी बेटे से पीछे नहीं

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