Saturday, 5 April 2014

कोबरा स्टिंग ऑपरेशन जन्मभूमि ( बाबरी मस्जिद विध्वंस)

कोबरापोस्ट ने ऑपरेशन जन्मभूमि के तहत बाबरी मस्जिद के बारे में बीजेपी की हिकमते अमली के रा़ज पर से पर्दा उठाते हुए सनसनीखेज खुलासा किया है कि मस्जिद को गिराने की जानकारी न सिर्फ कई बीजेपी लीडरों को थी, बल्कि इसके लिए कारसेवकों को तरबियत दी गयी थी।

कोबरपोस्ट का दावा है कि इस झगड़े की बुनियाद मे 1949 की एक घटना है, जब रामलला की मूर्ति को गुपचुप तरीके से बाबरी मस्जिद मे रखा दिया गया था। इस वाकिये के चश्मदीद गवाह कोई और नहीं, बल्कि राम जन्मभूमि तहरीक में अहम रोल निभाने वाले बी एल शर्मा प्रेम हैं। कोबरा पोस्ट ने 23 लीडरों को स्टिंग का वीडियो जारी किया है।
शर्मा का कहना है कि वो तब अयोध्या मे मिलिट्री पुलिस मे एक वारंट आफिसर के रूप मे तैनात थे। यह सब उनकी आंखों के सामने हुआ। तब अयोध्या के पुजारी रामचंद्र दास उनकी यूनिट मे बराबर आया जाया करते थे। एक दिन राम चन्द्र दास ने उन्हे बताया कि रामलला अमुक दिन ऐसे प्रकट होंगे, तो वहां अपने साथियों को लेकर आना। कोबरा ने दावा किया है कि उस दिन अयोध्या में जो कुछ हुआ, उसकी जानकारी लालकृष्ण आडवाणी, कल्याण सिंह समेत नरसिंह राव को भी थी।
कोबरापोस्ट का दावा है कि बाबरी मस्जिद को गिराने का साजिश विश्व हिन्दू परिषद और शिव सेना ने अलग अलग रची थी। इन दोनों संगठनो ने 6 दिसंबर से काफी पहले प्लान के तहत अपने कारकुनों को इस मकसद के लिए ट्रेनिंग दी थी। आरएसएस के तरबियत याफ्ता काकारकुनों का एक दस्ता भी बनाया गया था, जिसको बलिदानी जत्था भी कहा गया।
विहिप की युवा इकाई बजरंग दल के कारकुनों ने गुजरात के सरखेज मे इस मकसद के लिए एक महीने की तरबिय़त हासिल की। दूसरी ओर शिवसेना ने भी अपने कारकुनों के लिए ऐसा ही एक तरबिय़त कैंप भिंड-मुरैना मे लगाया था। इस मे लोगों को पहाड़ियों पर चढ़ने और खुदाई करने की तरबिय़त दी गयी थी।
6 दिसंबर को मस्जिद को तोड़ने के मकसद से छैनी, घन, गैंती, फावडा, सब्बल और दूसरी तरह के औजारों को खासी तादाद मे जुटा लिया गया था।
राम कथा मंच एक क़सम भी दिलायी गयी थी, उस वक़्त आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर और आचार्य धर्मेंद्र सहित कई जाने माने लीड़र और संत लोग थे। इसके फौरी बाद बाबरी मस्जिद को तोड़ने का काम शुरू कर दिया गया था।
वीएचपी के नेताओं ने बाबरी तो़डने के मकसद से कुछ दिन पहले अलग अलग जगहों पर 1200 संघ कार्यकर्ताओं को मिला कर एक सेना का कियाम किया था। इस गुप्त सेना का नाम लक्ष्मण सेना था। इस सेना को सभी सामान मुहय्या कराने और उनकी रहनुमाई का जिम्मा राम गुप्ता को सौपा गया था। इस सेना का नारा जय शेशावतार था।
दूसरी जानिब शिवसेना ने भी इसी तर्ज पर अयोध्या मे अपने मुक़ामी कारकुनों की एक सेना बना रखी थी। इसका नाम प्रताप सेना था। इसी सेना ने शिवसेना के बाबरी मस्जिद गिराने के लिए जरूरी सामान और मदद मुहय्या कराई थी। आरएसएस, वीएचपी और बजरंग दल के नेता के लीडरों के अलावा बाल ठाकरे और राज ठाकरे को भी इन सरगर्मियों की जानकारी थी और वे राब्ते में थे।

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