जला तो गुजरात भी था, गोधरा में रामसेवकों से भरी बोगी से लगाकर पूरे गुजरात के गांव व शहरों के अल्पसंख्यक चुन-चुन कर मारे गये, काटे गये, जिन्दा जला दिये गये, औरतों के साथ बलात्कार किए गये। गर्भवतियों के पेट फाड़कर भ्रूण निकालकर उन्हें हवा में उछाल कर काट डालने का नृशंस काम किया गया। इस नरसंहार के मामले में आपकी मंत्री मण्डलीय सहयोगी माया कोडनानी जेल में है। ईशरत जहां और सोहराबुद्दीन तथा तुलसीराम प्रजापत जैसे फर्जी एनकाउण्टरों में गुजरात के गृहमंत्री से लेकर डीजीपी तक सब सलाखों के पीछें पहुँचे है फिर भी आप गर्व से कहते है कि वर्ष 2002 के बाद गुजरात में कोई दंगा नहीं हुआ है, शांति है! वाकई, मरघट की शांति है, उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद जिन 1958 दंगा केसों को दुबारा खोला गया, उनमें से मात्र 117 मामलों में ही गुजरात पुलिस ने गिरफ्तारियां की है यानि कि कुल मामलों के मात्र 5 प्रतिशत में कार्यवाही, यह कैसा न्याय और शांति और विकास है आपके राज्य में ?
मोदी जी, लेकिन रात दिन देशभर में लाखों लोगों के बीच विकास का दावा करने और राष्ट्र को एक श्रेष्ठ राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराते-दोहराते अगर आप थोड़ी सी फुरसत में हो तो जरा उस गुजरात के विकास की बात कर लें, जिसे आप एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं।
निश्चित रूप से आपने देश भर के बड़े मुनाफाखोर उद्योग घरानों को गुजरात में आमंत्रित किया है, उन्हें मुफ्त जमीनें, टेक्सों में रियायतें, चमचमाती सड़कें और अबाध ऊर्जा दी है, ताकि वे और फल-फूल सकें तथा अपनी तिजोरियाँ भर सके, मगर उन 60 हजार छोटे स्तर के उद्योग धंधों का क्या हुआ जो विगत 10 वर्षों में बन्द हो गये ? विकास, विकास और सिर्फ विकास की माला जपने वाले हे विकास पुरूष, आँकड़े तो बताते हैं कि आपका गुजरात प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में आज पाँचवे पायदान पर है। आपको मालूम ही होगा कि सन् 1995 में जब आपकी पार्टी पहली बार सत्तारूढ़ हुयी तब गुजरात सरकार का कर्जा 10 हजार करोड़ रुपए से भी कम था, अब आपके निपुण और सार्मथ्यशाली नेतृत्व में वह 1 लाख 38 हजार 978 करोड़ तक पहुँच गया है तथा अनुमान है कि वर्ष 2015-16 के बजट तक यह 2 लाख करोड़ का जादुई आंकड़ा पार कर लेगा।
अन्नदाता किसान की बातें आपने कई जगहों पर उठाई, एक कृषि प्रधान देश के सम्भावित पंत प्रधान को निश्चित रूप से किसानों की चर्चा और चिन्ता करनी चाहिये लेकिन यह भी बताना चाहिये कि कृषि वृद्धि में गुजरात आठवें स्थान पर क्यों है ? गुजरात में खाद (उर्वरक) पर पाँच प्रतिशत वेट क्यों लगा रखा है जो कि इस देश में अधिकतम है। मार्च 2001 से अब तक जिन 4 लाख 44 हजार 885 किसानों के कृषि विद्युत कनेक्शन लम्बित हैं, उनके खेतों तक रोशनी कब पहुँचेगी ? या सिर्फ अदानी, अम्बानी, टाटाओं को ही माँगते ही बिजली कनेक्शन मिलते रहेंगे, और देश का भाग्य विधाता किसान दशकांे तक सिर्फ इंतजार करेगा, ‘जय जवान-जय किसान’ के अमर उद्घोषक लौहपुरूष के नाम पर देश भर से लौहा इकट्ठा कर रहे हे विकास पुरूष, गुजरात के इन लाखों किसानों को लौहे के चने चबाने पर क्यों मजबूर कर रखा है आपने ?
विचित्र वेशभूषा धारण करके मंचों पर मुट्ठियां बंद करके किसी भारोत्तोलक की भांति भंगिमाए बनाकर अपने गलत इतिहास बोध का परिचय देने तथा गुजरात में बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के लम्बे चौड़े दावे करने वाले कलियुगी विकास के हे अन्तिम अवतार, जरा यह भी तो बताते जाओ कि गुजरात के 26 जिलों के 225 ब्लॉक अब भी डार्क जोन में क्यों हैं ? राज्य के पाँच वर्ष से कम आयु के लगभग आधे बच्चे कुपोषण से क्यों पीड़ित हैं ? 70 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी और 40 प्रतिशत सामान्य से भी कम वजन के क्यों है ? क्या ये भी डाइटिंग कर रहे हैं ? एनीमिया से प्रभावित महिलाओं के मामले में गुजरात का स्थान 20वां है हालाँकि आप इसका स्पष्टीकरण भी दे चुके हैं कि गुजराती महिलाएं अपने बदन को इकहरा या छरहरा रखने के लिये और स्लिम तथा फिट दिखने के लिये डाइटिंग करती हैं, वाकई भूख और कुपोषण का इससे सुन्दर और रोचक जस्टिफिकेशन आपके सिवा कौन दे सकता है।
गुजरात के आठ शहरों तथा तीन तालुकों में 2894 शिक्षकों के पद खाली क्यों है, वहीं चार जिलों के 178 स्कूल एकल शिक्षक के भरोसे क्यों चल रहे हैं ? आपको सार्वजनिक शिक्षा की तो वैसे भी चिन्ता नहीं होगी क्योंकि आप तो निजीकरण के घनघोर पक्षधर हैं, इसलिये शिक्षा जैसी बुनियादी सेवा को भी पब्लिक स्कूलों के प्रतिस्पर्धी बाजार के हवाले करने में आपको कोई झिझक नहीं है।
आपके राज्य का स्वास्थ्य खर्च प्रतिवर्ष कम हो रहा है, आँकड़े बताते है कि राज्य स्तरीय बजट में स्वास्थ्य सम्बंधी मद में आवंटन के मामले में गुजरात का स्थान ऊपर से नहीं, नीचे दूसरा है, इसका मतलब यह नहीं है कि गुजरात में बीमार लोग नहीं है या उनके इलाज के लिये अस्पताल नहीं है,
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