आज जब प्रधानमंत्री की कुर्सी के लिये मोदी की छटपटाहट लगातार बढ़ रही है, मोदी को इन सवालों से दो चार होना ही पड़ेगा कि वह स्वाधीनता, समानता, धर्मनिरपेक्षता और न्याय जैसे आधारभूत सामाजिक मूल्यों में कोई विश्वास करते हैं अथवा नहीं? वस्तुतः उनके वैचारिक राजनैतिक पूर्वज, संघ परिवार के दार्शनिक और मार्गदर्शक बी.डी सावरकर ने मनुस्मृति को ही नियमों और कानूनों का आधार माना था। जैसा कि खुद सावरकर ने अपनी एक पुस्तक के अध्याय ‘मनुस्मृति और महिलाएं’ में लिखा है ‘मनुस्मृति वह ग्रन्थ है जो वेदों के पश्चात् हमारे हिन्दू राष्ट्र के लिये अत्यंन्त पूजनीय है तथा प्राचीनकाल से हमारी संस्कृति, आचार, विचार और व्यवहार की आधारशिला बन गयी है। यह ग्रन्थ सदियों से हमारे राष्ट्र के एहिक एवं पारलौकिक यात्रा का नियमन करता आया है। आज भी करोड़ों हिन्दू जिन नियमों के अनुसार जीवन यापन तथा व्यवहार-आचरण कर रहे हैं वे नियम तत्वतः मनुस्मृति पर ही आधारित है। आज भी मनुस्मृति हिन्दू नियम है’ (सावरकार समग्र, खंड 4 पृष्ठ संख्या 415)
बहरहाल, हम सभी इससे वाकिफ हैं कि मनुस्मृति में शुद्रों और महिलाओं के लिये क्या प्रावधान हैं। मनुस्मृति में कहा गया है कि यदि शुद्र किसी ब्राह्मण को धर्मोपदेश देने का दुस्साहस करे तो राजा को उसके कान और मुँह में गरम तेल डाल देना चाहिए (आठ/272 मनुस्मृति)। यह तो मात्र एक नमूना मात्र है जिसे मोदी के वैचारिक प्रतिनिधि और संघ के स्वयंसेवक कानून का आधार मानते हैं। आज मोदी अपनी सभाओं में खुद को चाय वाला या पिछड़ा कह कर वोट माँग रहे हैं, और पिछले कुछ दिनों से जिस तरह से वे खुद को राजनीतिक अछूत बता कर वोटरों से वोट माँग रहे हैं, क्या मोदी को पता भी है कि मनुस्मृति के अनुसार शूद्रों के साथ क्या व्यवहार किया जाता है?
खैर मोदी ने इतिहास की जानकारी के लिये विष्णु पांड्या और रिजवान कादरी को अपना सिपहसालार बनाया है। मोदी को चाहिए कि वे संघ के इन काले कारनामों को जानें और संघ से अपना नाता तोड़ लें। तभी पीएम की कुर्सी वाला रास्ता उनके लिये आसान होगा नहीं तो संघ से नाता नहीं तोड़ने वाले आडवाणी की तरह पीएम का उनका टिकट भी कभी कंफर्म नहीं हो पायेगा।
जिस संगठन का इस देश की जंगे आजादी की लड़ाई से, संविधान से कोई वास्ता नहीं रहा है वह राष्ट्र और तिरंगे की बात प्रधानमंत्री पद का स्वघोषित उम्मीदवार नरेंद्र मोदी करता है तो उनको कैसा लगता है।
आज सबसे पहले मोदी को अपनी पढाई लिखाई की जानकारी सम्पूर्ण राष्ट्र को देनी चाहिए। साथ में यह भी बताना चाहिए कि उनकी रैलियों का खर्च कौन उठा रहा है अन्यथा यह समझा जायेगा कि कोई कॉर्पोरेट सेक्टर या विदेशी शक्ति लाखों करोड़ों रुपये खर्च कर मोदी को मुखौटा बना कर इस देश को कब्ज़ा करना चाहता है।
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